भाजपा-रालोद गठबंधन से बनेंगे नए समीकरण, कई को लगेगा झटका कैराना से इन नेताओं के नाम पर हो सकता है मंथन

भाजपा-रालोद गठबंधन से बनेंगे नए समीकरण, कई को लगेगा झटका  कैराना से इन नेताओं के नाम पर हो सकता है मंथन

शामली। अभी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन, राजनीतिक पार्टियों में नफा-नुकसान का आकलन शुरू हो गया है। सपा-रालोद में सीट बंटवारे को लेकर बिगड़ी बात के बाद जहां नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं भाजपा-रालोद की ‘दोस्ती’ कैराना लोकसभा सीट की दिशा तय करेगी। देश की और प्रदेश की सबसे चर्चित सीट में से एक पर दावेदारों की लंबी कतार हैं, लेकिन यहां पर मुस्लिम-जाट का फार्मूला अधिक कारगर रहा है।

 

कैराना लोकसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई थी। उसी साल चुनाव हुआ था, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी यशपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। 2019 के चुनाव में सपा की तबस्सुम बेगम को भाजपा के प्रदीप चौधरी ने शिकस्त दी थी। अभी तक सपा-रालोद के गठबंधन को देखते हुए सभी संभावित प्रत्याशी तैयारी में जुटे थे।

कैराना विधायक की है मजबूत दावेदारी

माना जा रहा था कि कैराना विधायक नाहिद हसन की बहन इकरा हसन मजबूत दावेदार हैं। वह लखनऊ की दौड़ भी लगा रही थीं। साथ ही क्षेत्र में भी सक्रिय थीं। पूर्व सांसद अमीर आलम के बेटे और पूर्व विधायक नवाजिश भी दावा पेश कर रहे थे। उनके साथ ही पूर्व विधायक राव वारिश भी कतार में थे। अब सपा-रालोद की राह अलग होती दिख रही है, तो भाजपा-रालोद की ‘दोस्ती’ परवान चढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में कैराना लोकसभा सीट की नई तस्वीर उभर रही है।

ये राह नहीं होगी आसान, बस यूं समझ लीजिए

आंकड़ों की बात करें तो कैराना लोकसभा सीट पर करीब 17 लाख मतदाता हैं। इनमें से साढ़े 11 लाख हिंदू और करीब साढ़े पांच लाख मुस्लिम वोटर हैं। हिंदू वोटरों की बात करें तो सबसे अधिक जाटों की संख्या है, इसलिए यहां पर मुस्लिम-जाट का गठजोड़ अधिक देखा जाता है। अब बात करें बन रहे नए समीकरण कि तो बीजेपी के पास अपना वोट बैंक हैं, तो रालोद को जाट वोट अधिक मिलते हैं।

लेकिन, कैराना लोकसभा सीट पर अभी तक (सपा-रालोद गठबंधन) रालोद की ओर से संभावित मुस्लिम प्रत्याशी (नवाजिश आलम, राव वारिश) भागदौड़ में लगे थे। नई ‘दोस्ती’ के बाद मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देने से बीजेपी के कोर वोटर छिटक सकते हैं, इसलिए पार्टी को उनको भी साध कर रखना होगा।

वहीं रालोद के प्रत्याशी को टिकट मिलने से बीजेपी में दावा पेश कर रहीं पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह, एलएमसी विरेंद्र सिंह के बेटे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान और वर्तमान सांसद प्रदीप चौधरी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

अन्य दावेदार भी आ रहे सामने

बनते-बिगड़े रिश्तों के बीच लोकसभा चुनाव में ताल ठोकने के लिए कई दावेदार सामने आ रहे हैं। रालोद की बात करें तो पुराने समीकरण में जहां मुस्लिम प्रत्याशी की बात कही जा रही थी, वहीं अब जाट या फिर गुर्जर को तव्वजो मिल सकती है। सदर सीट से वर्तमान रालोद विधायक प्रसन्न चौधरी बीजेपी को छोड़कर ही रालोद में आए थे। अब वह भी टिकट की दावेदारी पेश कर रहे हैं। वह क्षेत्र में भी पूरी तरह से सक्रिय हैं।

इसके अलावा गुर्जर बिरादरी को देखते हुए भी कुछ नाम चर्चा में हैं, जिसमें एमएलसी विरेंद्र सिंह के बड़े भाई डा. यशवीर सिंह। वह पूर्व में ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन भी रह चुके हैं। राजनीति का भी लंबा अनुभव है। इसी तरह से एक नाम बुढ़ाना विधायक राजपाल बालियान का भी चल रहा है। चर्चा तो मलूक नागर के नाम पर भी चल रही है। इसके अलावा सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. सुधीर पंवार भी लाइन में हैं। वह 2017 में थानाभवन से विधानसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन हार मिली थी। वह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं।

सपा-बसपा की चर्चा, बात बनी तो पड़ेगा भारी

कैराना लोकसभा सीट में पांच विधानसभा शामली, कैराना, थानाभवन, नकुड़ और गंगोह शामिल हैं। पूरी लोकसभा सीट की बात करें तो करीब साढ़े पांच लाख मुस्लिम हैं। इसी तरह से दूसरे सबसे ज्यादा वोटर सैनी बिरादीर से हैं। पांच विधानसभा की बात करें तो प्रत्येक पर करीब 50-50 हजार अनुसूचित जाति के भी वोटर हैं। चर्चा है कि सपा-रालोद गठबंधन नहीं चलने के बाद अब सपा-बसपा की बात हो रही है। यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी-रालोद को चुनाव में कड़ी टक्कर मिलेगी।

कैराना सीट का चुनावी इतिहास

1962 - यशपाल सिंह निर्दलीय

1967 - गय्यूर अली खान संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी

1971 - शफ्कत जंग कांग्रेस

1977 - चंदन सिंह जनता पार्टी

1980 - गायत्री देवी जनता पार्टी एस

1984 - चौधरी अख्तर हसन कांग्रेस

1989 - हरपाल पंवार जनता दल

1991 - हरपाल पंवार जनता दल

1996 - मनव्वर हसन सपा

1998 - वीरेंद्र वर्मा भाजपा

1999 - अमीर आलम रालोद

2004 - अनुराधा चौधरी, रालोद

2009 - तबस्सुम हसन बसपा

2014 - बाबू हुकुम सिंह भाजपा

2018 उपचुनाव - तबस्सुम हसन रालोद

2019 - प्रदीप चौधरी भाजपा